आज की खबर: माली में 5 भारतीयों के साथ खौफनाक वारदात! अलकायदा से जुड़े आतंकियों ने किया अपहरण

अमेरिकी सरकार ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम के संभावित दुरुपयोग को लेकर कम से कम 175 कंपनियों की जांच शुरू कर दी है. यह वीजा योजना अमेरिकी कंपनियों को तकनीक और इंजीनियरिंग जैसे खास क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञ कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देती है. सरकार का कहना है कि यह कदम अमेरिकी नौकरियों की रक्षा और विदेशी पेशेवरों की तुलना में स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया गया है. राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन ने आप्रवासन सुधार और नौकरी संरक्षण को लेकर हाल ही में कई बड़े फैसले लिए हैं. क्या है ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’? सितंबर में श्रम विभाग ने ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ शुरू किया था. इसका मकसद कंपनियों को कमी वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने से रोकना और यह सुनिश्चित करना था कि योग्य अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी मिले. श्रम सचिव लोरी चावेज-डेरेमर ने कहा, “हम एच-1बी वीजा के दुरुपयोग को रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं. पहली बार मैं खुद इन जांचों को प्रमाणित कर रही हूं ताकि अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा हो.” सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान हाल ही में श्रम विभाग ने सोशल मीडिया पर भी एक अभियान चलाया, जिसमें कुछ कंपनियों पर युवा अमेरिकी कर्मचारियों को सस्ते विदेशी कर्मचारियों से बदलने का आरोप लगाया गया. इस अभियान में विशेष रूप से भारत को एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी बताया गया. संदेश साफ था अमेरिकी सपने को अमेरिकी कर्मचारियों से छीन लिया गया और एच-1बी वीजा के गलत इस्तेमाल से नौकरियां विदेशी कर्मचारियों को दी गई हैं. अमेरिकी सरकार का मकसद सरकार ने जोर देकर कहा है कि वह कंपनियों को जवाबदेह ठहराएगी और अमेरिकी नागरिकों के लिए अमेरिकी सपने को बहाल करेगी. एच-1बी वीजा लंबे समय से अमेरिकी टेक उद्योग में वैश्विक प्रतिभा लाने का जरिया रहा है, लेकिन अब यह नौकरी सुरक्षा और आप्रवासन सुधार पर बहस का मुख्य मुद्दा बन गया है. ये भी पढ़ें- अब किस बात से नाराज हो गए ट्रंप? साउथ अफ्रीका पर जमकर बोला हमला, G20 समिट का किया बहिष्कार
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