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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि 1 दिसंबर 2025 तक एक ऐसी नीति तैयार की जाए, जिससे रूस रेयर अर्थ मेटल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके. यह योजना रूस की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ उसे दुनिया की तकनीकी ताकतों में शामिल करने की कोशिश है. रेयर अर्थ मेटल का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों, पवन टर्बाइन, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों में किया जाता है. जो देश इन संसाधनों पर नियंत्रण रखेगा, वही आने वाले समय की तकनीकी और औद्योगिक दौड़ में सबसे आगे रहेगा. संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में लगभग 11 करोड़ टन रेयर अर्थ मेटल हैं. इसमें चीन सबसे आगे है, जबकि रूस लगभग 38 लाख टन भंडार के साथ 5वें स्थान पर है. रूस के पास रेयर अर्थ मेटल का भंडार बड़ा है, लेकिन रूस की उत्पादन क्षमता अभी भी बहुत कम है, जो कुल वैश्विक उत्पादन का केवल 0.6 प्रतिशत है. चीन का दबदबा और अमेरिका की चुनौती चीन इन धातुओं का सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया के करीब 70 प्रतिशत उत्पादन पर उसका नियंत्रण है. साल 2025 में चीन ने अमेरिका के खिलाफ निर्यात पर अस्थायी रोक लगाई थी, जिससे अमेरिकी उद्योगों में हड़कंप मच गया. इसके बाद में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के बाद यह रोक अस्थायी रूप से हटा ली गई. अब अमेरिका नए साझेदारों की तलाश में है ताकि उसकी तकनीकी सप्लाई पर चीन की पकड़ कम हो सके. रूस की नई रणनीति रूस के पास अब दो रास्ते हैं या तो वह चीन के साथ मिलकर खनिजों को प्रोसेस कर निर्यात बढ़ाए या फिर अमेरिका और यूरोपीय देशों से निवेश आकर्षित कर नए खनन प्रोजेक्ट शुरू करे. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम रूस को आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूत बना सकता है. संसाधन तो हैं पर मुश्किलें भी रूस के पास लगभग 15 दुर्लभ मृदा धातुओं के 2.85 करोड़ टन भंडार हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी खुदाई और प्रसंस्करण बेहद महंगा है. कई खनिज क्षेत्र कठिन भौगोलिक इलाकों में हैं और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण निवेश भी सीमित है. इसी वजह से रूस की कई परियोजनाएं अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई हैं. अमेरिका और रूस एक नया समझौता? डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया कि अगर रूस यूक्रेन के दक्षिण और पूर्वी इलाकों में स्थित खनिज स्थलों तक अमेरिकी कंपनियों को पहुंच देता है तो अमेरिका रूस के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ा सकता है. इस पर पुतिन ने कहा कि रूस रेयर अर्थ मेटल के क्षेत्र में विदेशी साझेदारी के लिए तैयार है.” रूस का लक्ष्य तकनीकी स्वतंत्रता रूस अब तेल और गैस के भरोसे नहीं रहना चाहता. वह चाहता है कि आने वाले वर्षों में उसकी पहचान रेयर अर्थ मेटल की वैश्विक ताकत के रूप में बने. अगर उसकी नई नीति सफल रही तो रूस आने वाले दशक में अमेरिका और चीन जैसे देशों को टक्कर दे सकता है. ये भी पढ़ें: 11 सालों में चौथी बार भूटान पहुंचेगे…
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